दिनकर उजाला देता था, देता रहेगा
रोज़ सूरज की तरह रोशन करता था यह दिन को
हर कोशिश से दूर करता था दुखियों के दर्द को
कहाँ छुप गया , न जाने कहाँ खो गया
बहुत खूबसूरत आत्मा थी दिनकर
देह छोड़कर भी कहीं जगमगा रहा होगा
वह चंचलता , वह हमदर्दी , वह सरलता
वह शुद्धता , वह महनत कहाँ ढूंढोगे दोस्तों
इस देवता को देवों ने बुला लिया है
पर फिर भी दिनकर न रुका है , न रुकेगा
वह उजाला देता था , देता रहेगा
नहीं चाहा अपने लिए कुछ भी कभी भी
नहीं ली पानी की एक बूँद भी हमसे
दिल में रहकर हमारी प्रेरणा बनेगा
और उसका श्रेय भी हमें दे जायेगा
सूरज की मानिंद चमकता यह दिनकर
ताउम्र दिलों में हमारी दहकता रहेगा
उजाला देता था , देता रहेगा
दिलों में सूरज दहकता दिनकर था, दिनकर हमारे दिल में रहेगा
(Composed by My Mummy)

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